Apple Inc. ने हाल ही में अमेरिका में अतिरिक्त $100 बिलियन के निवेश की घोषणा की है, जिससे कुल अमेरिकी निवेश $600 बिलियन तक पहुंच गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने iPhones पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी यदि उनका उत्पादन अमेरिका में नहीं लाया गया।
निवेश का उद्देश्य
Apple का यह कदम केवल व्यापार विस्तार नहीं है, बल्कि यह अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की रणनीति का हिस्सा है। इस निवेश के तहत कंपनी:
- नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित करेगी
- नए तकनीकी हब बनाएगी
- रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर अधिक ध्यान देगी
- लाखों अमेरिकियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगी

राजनीतिक दबाव और टैरिफ की धमकी
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले Apple को चेतावनी दी थी कि यदि वे अपनी मैन्युफैक्चरिंग चीन से अमेरिका में नहीं लाते, तो iPhones पर भारी टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप की इस धमकी ने Apple को मजबूर कर दिया कि वह अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करे।
भारत और चीन पर प्रभाव
Apple का यह फैसला भारत और चीन जैसे देशों पर भी असर डालेगा, जहां कंपनी का बड़ा प्रोडक्शन बेस है:
- भारत: भारत में Apple का विस्तार जारी रहेगा, लेकिन प्राथमिक उत्पादन केंद्र धीरे-धीरे अमेरिका की ओर शिफ्ट हो सकता है।
- चीन: चीन में Apple के उत्पादन में गिरावट आ सकती है, जिससे चीन-अमेरिका ट्रेड रिलेशन पर भी असर पड़ सकता है।
तकनीक और नवाचार को बढ़ावा
Apple ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह निवेश केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- मशीन लर्निंग
- ग्रीन टेक्नोलॉजी
- स्मार्ट चिप्स
जैसी उन्नत तकनीकों के विकास में भी खर्च किया जाएगा।
रोजगार और आर्थिक विकास
इस निवेश से अमेरिका में:
- लगभग 1 मिलियन नए रोजगार सृजित होने की संभावना है
- स्थानीय सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी
- छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स को लाभ मिलेगा
Apple का यह $100 बिलियन का अमेरिकी निवेश केवल एक व्यापारिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति, व्यापार रणनीति और तकनीकी नवाचार का सम्मिलित परिणाम है। इससे न केवल अमेरिका में आर्थिक वृद्धि होगी, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।