भारत सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ग्रीन फ्यूल कोड में बदलाव की घोषणा की है, जिससे Flex-Fuel Vehicles (FFVs) को तेजी से बढ़ावा मिलेगा। यह कदम न केवल पर्यावरण को लाभ देगा बल्कि देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए भी एक नया युग साबित हो सकता है।
Flex-Fuel Vehicles ऐसे वाहन होते हैं जो पेट्रोल और इथेनॉल दोनों को फ्यूल के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। अब जब सरकार ने ग्रीन फ्यूल कोड को सरल किया है, तो ये वाहन आम भारतीय सड़कों पर चलने को तैयार हैं।
ग्रीन फ्यूल कोड में क्या बदलाव हुआ?
सरकार ने इथेनॉल ब्लेंडिंग नॉर्म्स में ढील दी है, जिससे कंपनियाँ 20% से अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर भी वाहन बना सकेंगी।
इसके अलावा, अब Flex-Fuel Engines के प्रमाणन को और आसान कर दिया गया है जिससे अधिक निर्माता इस सेगमेंट में प्रवेश कर सकें।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के फायदे
1. ईंधन विकल्प की स्वतंत्रता (Fuel Choice Freedom)
Flex-fuel वाहन उपभोक्ताओं को विकल्प देते हैं कि वे पेट्रोल भरवाएं या इथेनॉल, जो भी सस्ता हो।
2. कम प्रदूषण (Less Pollution)
इथेनॉल एक क्लीनर फ्यूल है, जो CO2 उत्सर्जन को कम करता है।
3. कृषि को बढ़ावा (Boost to Agriculture)
इथेनॉल गन्ने और मक्का जैसे कृषि उत्पादों से बनता है, जिससे किसानों को नई आय के स्रोत मिलते हैं।
4. तेल आयात में कमी (Reduced Oil Import Bill)
Flex-Fuel के बढ़ते प्रयोग से भारत की विदेशी मुद्रा पर बोझ कम होगा।

कौन-कौन सी कंपनियाँ तैयार हैं?
भारत में कई वाहन निर्माता कंपनियाँ पहले ही Flex-Fuel मॉडल्स पर काम कर रही हैं:
- Maruti Suzuki ने 2025 तक अपने कई मॉडल्स को Flex-Fuel कॉम्पैटिबल बनाने की योजना बनाई है।
- Toyota ने पहले ही Corolla Altis का Flex-Fuel वर्जन लॉन्च कर दिया है।
- TVS और Bajaj जैसे दोपहिया वाहन निर्माता भी Flex Fuel स्कूटर और बाइक पर काम कर रहे हैं।
ग्राहक क्या सोचते हैं?
भारतीय ग्राहक फिलहाल पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं। ऐसे में Flex-Fuel वाहन उन्हें एक किफायती और पर्यावरण हितैषी विकल्प दे सकते हैं।
हालांकि, बाजार में इथेनॉल-डिस्पेंसिंग पेट्रोल पंपों की संख्या अभी सीमित है, जिसे बढ़ाने के लिए सरकार तेजी से कदम उठा रही है।
सरकार की रणनीति और भविष्य की दिशा
सरकार 2030 तक 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य पहले ही निर्धारित कर चुकी है।
Flex-Fuel Vehicles इस लक्ष्य को जल्द हासिल करने में मदद करेंगे। इसके लिए:
- नई सब्सिडी योजनाएं लाई जा सकती हैं
- निर्माता कंपनियों को टैक्स में राहत दी जा सकती है
- इथेनॉल पंप नेटवर्क का तेजी से विस्तार होगा
Flex-Fuel Vehicles भारत के भविष्य का ईंधन समाधान बन सकते हैं।
सरकार की पहल और कंपनियों की तत्परता से यह स्पष्ट है कि अब भारत ग्रीन एनर्जी की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा चुका है।
पेट्रोल की कीमतें, प्रदूषण और तेल आयात पर निर्भरता—इन सभी समस्याओं का हल शायद इसी एक बदलाव में छुपा है।